Dehradun Flood: टोंस नदी में मजदूरों की दर्दनाक बहने की घटना
देहरादून और इसके आसपास के क्षेत्रों में मंगलवार को मानसून ने कहर बरपाया। पहाड़ों में हुई तेज बारिश के बाद मैदानी इलाकों में पानी का स्तर बढ़ गया और टोंस नदी उफान पर आ गई। प्रेमनगर थाना क्षेत्र में खनन कार्य में लगे दस मजदूर नदी में बह गए।
इस दर्दनाक घटना में आठ मजदूरों की मौत हो चुकी है जबकि दो की तलाश जारी है। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि मजदूर नदी के तेज बहाव के बावजूद काम में व्यस्त थे और अचानक पानी बढ़ते ही वे अपनी जान बचाने की कोशिश करने लगे।
Dehradun Flood: कैसे हुआ यह हादसा
देहरादून और उसके आसपास के क्षेत्रों में मंगलवार को मानसून की बारिश ने अचानक कहर बरपाया। पहाड़ों में हुई तेज बारिश के बाद पानी का स्तर बढ़ गया और सहस्त्रधारा के कार्लीगाड क्षेत्र में बादल फटने की घटना ने इलाके में तबाही मचा दी। प्रेमनगर थाना क्षेत्र में खनन कार्य में लगे मजदूर अचानक तेज बहाव वाली टोंस नदी के सामने आ गए।

वीडियो और समाचार सूत्रों के अनुसार, मजदूर अपनी जान बचाने के लिए ट्रॉली पर चढ़ गए, लेकिन नदी का वेग इतना तेज था कि वे बच नहीं पाए। नदी का पानी और मलबा इतनी तेजी से बह रहा था कि मजदूरों के चिल्लाने और मदद मांगने के बावजूद उन्हें बचाया नहीं जा सका।
इस हादसे के बाद तुरंत एसडीआरएफ और पुलिस की टीम मौके पर पहुंची और राहत व बचाव कार्य शुरू किया। नदी के किनारे फंसे अन्य लोगों को भी सुरक्षित निकाला गया। भारी बारिश के कारण मसूरी और आसपास के इलाकों में सड़कों और रास्तों पर पानी और मलबा भर गया, जिससे यातायात पूरी तरह प्रभावित हो गया। प्रशासन ने प्रभावित लोगों को सुरक्षित स्थानों पर ले जाने और राहत कार्य सुनिश्चित करने के लिए तुरंत कदम उठाए।
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Dehradun Flood: मजदूरों की संघर्षपूर्ण कहानी
वीडियो में मजदूर ट्रॉली पर चढ़कर नदी के किनारे खड़े अपने साथियों से मदद मांगते दिख रहे थे। उनके चिल्लाने और सुरक्षा के लिए आवाज़ लगाने के बावजूद पानी की ताकत इतनी अधिक थी कि वे सभी बहकर दूर चले गए।
घटना की सूचना मिलते ही एसडीआरएफ की टीम मौके पर पहुंची और बचाव कार्य शुरू किया। अभी तक आठ शव बरामद हो चुके हैं, जबकि दो मजदूरों की तलाश जारी है। यह घटना देहरादून में मानसून की अचानक तबाही का एक उदाहरण है, जिसने सभी को हिला कर रख दिया।
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Dehradun Flood: राहत और बचाव कार्य
भारी बारिश और बाढ़ के कारण मसूरी और देहरादून के कई हिस्सों में पर्यटक और स्थानीय लोग फंस गए। मसूरी में यात्रा कर रहे पर्यटकों के लिए होटलों और होमस्टे में निशुल्क प्रवास की व्यवस्था की गई और खतरनाक इलाकों से उन्हें धर्मशालाओं और गुरुद्वारों में शिफ्ट किया गया।
देवभूमि इंस्टीट्यूट परिसर में करीब 200 छात्र-छात्राएं फंस गए थे, जिन्हें एसडीआरएफ ने सुरक्षित बाहर निकाला। सहसपुर थाना क्षेत्र में उफनती नदी में फंसे पांच लोगों को भी रेस्क्यू ऑपरेशन के जरिए बचाया गया।
Dehradun Flood: सड़क और यातायात प्रभावित
भारी बारिश के कारण कई मुख्य मार्ग बंद हो गए। कैंट क्षेत्र, कालसी-चकराता रोड और रानीपोखरी इलाके में सड़कें क्षतिग्रस्त हुईं। जेसीबी और राहत टीमों की मदद से मलबा हटाकर यातायात बहाल करने का प्रयास किया जा रहा है। जिलाधिकारी सविन बंसल और एसएसपी अजय सिंह ने प्रभावित क्षेत्रों का निरीक्षण कर अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे प्रभावित लोगों को सुरक्षित स्थानों पर ले जाएं और हर संभव मदद सुनिश्चित करें।

देहरादून में आई यह प्राकृतिक आपदा लोगों के लिए एक गंभीर चेतावनी है। बारिश और बाढ़ ने कई परिवारों की खुशियाँ छीनी हैं। प्रशासन, राहत एजेंसियां और स्थानीय लोग मिलकर बचाव और राहत कार्यों में जुटे हुए हैं। इस कठिन समय में सभी को सतर्क रहना और अधिकारियों के निर्देशों का पालन करना अत्यंत आवश्यक है।
Dehradun Flood: FAQs
Q1. देहरादून में यह बाढ़ कब आई थी?
उत्तर: देहरादून में यह बाढ़ मंगलवार, 16 सितंबर 2025 को भारी बारिश और बादल फटने के कारण आई थी।
Q2. टोंस नदी में कितने मजदूर बह गए?
उत्तर: प्रेमनगर थाना क्षेत्र में खनन में लगे कुल 10 मजदूर बह गए। इनमें से 8 की मौत हो चुकी है और 2 की तलाश जारी है।
Q3. बचाव कार्य कैसे हुआ?
उत्तर: एसडीआरएफ और पुलिस की टीम तुरंत मौके पर पहुंची। देवभूमि इंस्टीट्यूट और सहसपुर थाना क्षेत्र में फंसे लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला गया।
Q4. मसूरी में पर्यटकों की स्थिति क्या रही?
उत्तर: भारी बारिश और संभावित खतरे के कारण मसूरी में सभी होटलों और होमस्टे में रहने वाले पर्यटकों को निशुल्क प्रवास की व्यवस्था दी गई और उन्हें सुरक्षित स्थानों पर शिफ्ट किया गया।
डिस्क्लेमर: यह आर्टिकल रिपोर्ट और सोशल मीडिया स्रोतों पर आधारित है। घटनाओं और आंकड़ों की पुष्टि संबंधित अधिकारियों द्वारा की जा सकती है।





