छठ पूजा सूर्य देव और छठी मैया की आराधना का पवित्र पर्व है। यह परिवार में सुख, स्वास्थ्य और समृद्धि लाता है।
छठ पूजा सूर्य देव और छठी मैया की आराधना का पवित्र पर्व है। यह परिवार में सुख, स्वास्थ्य और समृद्धि लाता है।
छठ पर्व का दूसरा दिन ‘खरना’ कहलाता है। यह 27 अक्टूबर 2025 को मनाया जाएगा, व्रतियों के लिए खास उत्सव है।
छठ पर्व का दूसरा दिन ‘खरना’ कहलाता है। यह 27 अक्टूबर 2025 को मनाया जाएगा, व्रतियों के लिए खास उत्सव है।
खरना के दिन महिलाएं पूरे दिन निर्जला व्रत करती हैं। यह आत्मसंयम, श्रद्धा और भक्ति का प्रतीक माना जाता है।
खरना के दिन महिलाएं पूरे दिन निर्जला व्रत करती हैं। यह आत्मसंयम, श्रद्धा और भक्ति का प्रतीक माना जाता है।
उपवास के बाद खीर, रोटी और गुड़ का प्रसाद तैयार किया जाता है। इसे परिवार और मित्रों में बांटा जाता है।
उपवास के बाद खीर, रोटी और गुड़ का प्रसाद तैयार किया जाता है। इसे परिवार और मित्रों में बांटा जाता है।
खरना के दिन दीपक जलाकर सूर्य देवता और छठी मैया की आराधना होती है। विशेष मंत्रों से पूजा सम्पन्न की जाती है।
खरना के दिन दीपक जलाकर सूर्य देवता और छठी मैया की आराधना होती है। विशेष मंत्रों से पूजा सम्पन्न की जाती है।
पूजा से पहले घर को अच्छी तरह साफ और सजाया जाता है। यह धार्मिक श्रद्धा और सकारात्मक ऊर्जा को दर्शाता है।
पूजा से पहले घर को अच्छी तरह साफ और सजाया जाता है। यह धार्मिक श्रद्धा और सकारात्मक ऊर्जा को दर्शाता है।
महिलाएं छठी मैया से स्वास्थ्य, संतान सुख और घर में सुख-शांति की प्रार्थना करती हैं। भक्ति से पूजा का महत्व बढ़ता है।
महिलाएं छठी मैया से स्वास्थ्य, संतान सुख और घर में सुख-शांति की प्रार्थना करती हैं। भक्ति से पूजा का महत्व बढ़ता है।
गांव और शहरों में लोग सामूहिक रूप से घाटों पर पूजा करते हैं। यह सामाजिक एकता और सांस्कृतिक परंपरा का प्रतीक है।
गांव और शहरों में लोग सामूहिक रूप से घाटों पर पूजा करते हैं। यह सामाजिक एकता और सांस्कृतिक परंपरा का प्रतीक है।
सूर्योदय और सूर्यास्त के समय विशेष अर्घ्य दिया जाता है। यह प्रकृति और सूर्य के प्रति श्रद्धा प्रकट करता है।
सूर्योदय और सूर्यास्त के समय विशेष अर्घ्य दिया जाता है। यह प्रकृति और सूर्य के प्रति श्रद्धा प्रकट करता है।
उषा अर्घ्य के साथ 28 अक्टूबर 2025 को छठ पूजा समाप्त होती है। व्रति का समर्पण और उपवास की सफलता दर्शाता है।
उषा अर्घ्य के साथ 28 अक्टूबर 2025 को छठ पूजा समाप्त होती है। व्रति का समर्पण और उपवास की सफलता दर्शाता है।